भारत में बहुत ही आम हो चुकी एक घटना :- जरही-भटगाँव में 24-03-2022 को हुए एक बलात्कार, व उसके बाद निर्मम तरीक़े से बालिका की हत्या करने की घटना सामने आयी है, पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछ-ताछ की, जिसमें आरोपी द्वारा अपराध स्वयं द्वारा किए जाने की बात स्वीकार की है। आरोपी पे ‘भारतीय दंड संहिता’(IPC) sec.450,376,302, की धाराओं के साथ दंडात्मक कार्यवाही शुरू की जा चुकी है, प्रक्रिया पूर्ण होने पर माननीय दंडाधिकारी महोदय द्वारा आरोपी को ‘भारतीय संविधान, में उल्लेखित नियमो व प्रावधानो के अनुसार दंडित कर जेल भेज दिया जाएगा,आरोपी अपने शेष जीवन के कुछ वर्ष, या अपना सम्पूर्ण जीवन जेल में व्यतीत करेगा, किन्ही चुनिंदा बलात्कार के मामलों में फाँसी की सजा दी जाती है। पर, क्या यह दण्ड पर्याप्त है? एक ऐसे विकृत मानसिकता के व्यक्ति की जो अपनी आज़ादी का ग़लत फ़ायदा उठा कर किसी लड़की के जीवन को ऐसे भयानक तरीक़े से रौंद डालता है जिसे कभी भी उसके परिवार और करीबी लोग भूल ना सकेंगे, एक सुरक्षित समाज की संकल्पना कैसे की जाए? 2013 में हुए निर्भया कांड के आरोपियों को हमारी उच्चतम न्यायालय द्वारा 7 ...
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