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दिल्ली HC ने पलटा निचली अदालत का फैसला, जामिया हिंसा मामले में शरजील इमाम समेत 9 पर चलेगा केस: कोर्ट - हिंसा करना अधिकार में नहीं आता

दिल्ली :   साल 2019 जामिया हिंसा मामले में दिल्ली कोर्ट ने आज (28 मार्च 2023) निचली अदालत का फैसला पलटते हुए अपना निर्णय सुनाया। जिसमे उन्होंने 11 में से 9 आरोपितों के खिलाफ आरोप तय किए है। इनमें शरजील इमाम, सफूरा जरगर और आसिफ इकबाल समेत 9 का नाम है। इससे पहले निचली अदालत ने 11 आरोपितों को आरोपमुक्त किया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में फैसले को लेकर अपनी  याचिका डाली थी। Jamia violence discharge case | Delhi HC partially overturned trial court order and charged 9 out of 11 accused including Safoora Zargar, Sharjeel Imam under sections related to rioting, unlawful assembly, obstructing public servants and other sections. pic.twitter.com/kkkhtvYAsn — ANI (@ANI) March 28, 2023 जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने फैसला देते हुए कहा कि शांतिपूर्ण रूप से एकजुट होने के अधिकार में कुछ प्रतिबंधों के अधीन है और हिंसा करना या हिंसक भाषणा देना किसी भी हाल में उस अधिकार में संरक्षित नहीं होते। कोर्ट ने आरोप तय करते हुए कुछ आरोपितों पर कहा, “वीडियो के शुरू में ही दिख रहा...

Assam Voilence पर पूरी खबर देखें : जाने क्या है सच और क्या है झूठ

असम : में हुई झड़प को किस प्रकार से साम्प्रदायिक रंग में दिया गया ये बेहद ही शर्मनाक है, आखिर देश का एक वर्ग हमेशा देश को आग लगाने के लिए ही क्यो चाले चलता है, आखिर बुद्धिजीवियों और लेफ्ट पत्राकारों को हमेशा किसी भी पुलिस कार्यवाही में धर्म क्यो नजर आता है वो उस घटना के पहलू पर जाने की क्यो नही सोचते है। आखिर उनके राजनीति व TRP के चक्कर मे आम आदमी आपस मे लड़ जाता है, ऐसा कब तब इस देश का एल धड़ा ऐसा कार्य करता रहेगा। पढ़े पूरी रिपोर्ट इस घटना क्रम के बारे में . असम के दरांग जिले के सिपाझार में गुरुवार को अतिक्रमण हटाने को लेकर पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच हिंसक झड़प हो गई। इस झड़प में दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई है। इसके अलावा नौ पुलिसकर्मियों के भी घायल होने की खबर है। ये झड़प तब हुई जब पुलिसकर्मियों की एक टीम अतिक्रमण हटाने के लिए इलाके में गई थी। असम सरकार ने दरांग जिले के सिपाझार के गोरुखुटी गांव में बड़े पैमाने पर अभियान चलाया गया था। इसके तहत करीब 800 परिवारों को हटाया गया। असम सरकार का दावा है कि ये लोग यहां अतिक्रमण करके रह रहे थे। इस गांव में ज्यादातर पूर्वी बंगाल मूल के ...

स्वरा भास्कर" न घर की न घाट की" आंबेडकरवादी, लेफ्ट वाले उसके ही पढ़ गए पीछे- जाने पूरी खबर

बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर को इन दिनों खुद के बनाये गए चरित्र के कारण गाली खानी पड़ रही है क्योकि जिन मुद्दों को लेकर वो हमेशा चर्चा में रहती है वो उसमे डुबकी लगती हुई नजर आई जिससे उनके प्रसंसक लोग चीड़ गए और उन्हें बुरा भला कहना प्रारम्भ कर दिया। Praying to my Hindu Gods & still don’t want to kill or lynch Dalits or Muslims, still don’t believe in or practice discrimination, still believe in social justice, Liberty & equality. Still can raise my voice against injustice, hate & bigotry. Shockingly, it’s possible! 🤓💜✨ pic.twitter.com/IYf9HsIvps — Swara Bhasker (@ReallySwara) August 27, 2021 ऐसा हुआ इसलिए कि हाल ही में अपने नए घर के लिए गृह प्रवेश समारोह के दौरान की गई पूजा की कुछ तस्वीरें उन्होंने सोशल मीडिया में साझा की थीं। उनकी राजनीतिक हरकतों को देखते हुवे तस्वीरे कुछ अजीब लगी लेकिन उनका हिन्दू सभ्यता से जुड़ा रहना एक तरफ से ठीक भी लगा। क्योकि ऐसा भारत की राजनीति में बोहोत कब होता है कि कोई लिबरल अपने हिन्दू सभ्यता का जश्न मनाते हुवे देखा जाए। तस्वीरें अच्छी थी, ले...

सीधी बात मोदी जी के नाम - shut up virodhi

नमस्कार, प्रधानमंत्री मोदी जी आपकी सरकार ने किसान वर्ग की समस्याओं को दूर करने के लिए कृषि सुधार बिल के जरिये नए कानून भी बनाकर इस देश के किसानों के ऊपर थोप दिए है। जिसका असर ये हो रहा है कि दिल्ली जो आप राजनीति करने वालों का अड्डा है वो एक बार फिर से शाहीन बाग वाले मोड़ में है जैसा शाहीनबाग में हुवा था विरोध और CAA को वापस लेने की मांग की जा रही थी और उसे भी काला कानून कहाँ गया था मुस्लिम समुदायों के तरफ से आज उसी प्रकार किसानों के लिए लाया गया बिल आज किसान ही उसे काला बिल कह रहा है।। प्रिय मोदी जी गलती न किसानों की है न उनका समर्थन करने वालों की वो इसलिए कि जिस प्रकार सरकार के साथ जो खड़े है उन्हें भी बिल के बारे में कुछ खास पता नही और जो किसानों के साथ खड़े होने और उनके साथ आवाज बुलंद करने में लगे है उन्हें भी कुछ पता नही।। अब बात सीधी करते है आपको आदत हो गयी है बबाल को बढ़ाने का और देश मे जानबूझकर आम आदमी को परेशान करने का वो इसलिए क्योकि जो बिल आपने बिना किसी से पूछे व राज्यसभा में बिना वोटिंग कराए पास करवाया है वो विचारणीय है। खैर जिस समस्या को आप सिर्फ एक घंटे में खत्म कर सकते ह...