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सुप्रीम कोर्ट: प्राइवेट अस्पतालों के रेट पर लगाम लगाए केंद्र सरकार नही तो हमको करना पड़ेगा। पढ़े पूरी खबर

सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेट अस्पतालों के जरिए वसूले जाने वाले मनमानी पैसे को लेकर नाराजगी व्यक्त की है. अदालत ने 14 साल पुराने कानून 'क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट (सेंट्रल गवर्नमेंट)' नियमों को लागू करने में केंद्र की असमर्थता को लेकर कड़ी आपत्ति जताई. नियमों के तहत राज्यों से सलाह के बाद महानगरों, शहरों और कस्बों में बीमारियों के इलाज और उपचार के लिए एक स्टैंडर्ड रेट का नोटिफिकेशन जारी करना अनिवार्य है.  @shutupvirodhi सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा, 'अगर केंद्र सरकार इस समस्या का समाधान ढूंढने में विफल होती है, तो हम देशभर में मरीजों के इलाज के लिए CGSH-निर्धारित स्टैंडर्ड रेट को लागू करने के लिए याचिकाकर्ता की याचिका पर विचार करेंगे.'

मोदी का राष्ट्रवाद क्यो है चुभता, विपक्ष की आखिर क्या है मंशा - पढ़े पूरी खबर

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब से प्रधानमंत्री बने तब से आज तक विपक्ष उनकी निजी और राजनैतिक दोनों ही प्रकार से विरोध करता रहा है, ऐसा कोई भी विपक्षी दल नही जो नरेंद्र मोदी को गलत साबित या अच्छे नेता के रूप में पसंद करता हो। Narendra Modi वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की एकतरफा जीत ने विपक्ष की नींद तो वैसे ही उड़ा दी थी कि उनको सम्भालने में 5 साल लग गए और जब खड़े हुवे और चुनाव में उतरे तो 2014 से भी बुरा हाल हो गया विपक्ष का इससे ही नाराज विपक्ष प्रधानमंत्री मोदी के मानो जैसे पीछे ही पड़ गया हो। विपक्ष का एक-एक नेता मोदी जी के कार्य को न देखकर सिर्फ विरोध करने लगा वो उस  हर एक मुद्दे पर गंदी राजनीति करने लगा जिससे देश और देशवासियों को नुकसान भी उठाना पड़ जाए। चाहे वो किसी बिल को लेकर हो या संविधान संशोधन को लेकर हो या सरकार के द्वारा लाई जा रही देशव्यापी योजनाओं को लेकर हो विपक्ष हर चीज़ का विरोध करने लगा। जैसा कि नरेंद्र मोदी जी का छवि एक हिन्दू हृदय एवं देशभक्त के रूप में जाना जाता है क्योकि वो राष्ट्रीय स्वयं सेवक के रूप में कई वर्षों तक सेवा का क...

देश को यही दिखाना है बलात्कार होने पर शोर मचाना है

देश को यही दिखाना है बलात्कार होने पर शोर मचाना है  बलात्कार जैसे घटना पर भी राजनीति इन नेताओ को शर्म क्यो नहीं आती ।  जैसा की आप सभी को बता दे की देश में किस प्रकार से टेलीविशन के माध्यम से व् अब मोबाइल के माध्यम से कितनी फूहड़ता देश में फैलाई और दिखाई जाती है आप सभी जानते है की किस  प्रकार देश में बैठ कर कुछ लोग भारत जैसे पारम्परिक जीवनशैली में जीने वाले लोगो को एक मिशन के तहद विनास के और ले जा रही है.  Rape case in india भारत देश की फ़िल्मी जगत सबसे बड़ा माध्यम है इस की संस्कृति को बर्बाद व् नुकसान पहुंचने के लिए क्योकि देश में जब से इसका उदय हुवा है तभी से देश की जनता इनके द्वारा बनाई जाने वाली कहानी जो की इनकी गन्दी  विचारधारा को प्रस्तुत करती है।  देश में पल रहे फ़िल्मकार , लेखक, सपादक, गीतकार अन्य लोग जो मिलकर एक पूरी कहानी को जनता के सामने प्रस्तुत करती है वो किस प्रकार कुछ पैसों के लिए अपने देश व् उसकी संस्कृति के साथ खिलवाड़ कर सकती है जो हम आपको आगे बताएंगे की किस प्रकार से इन्होने देश की एकता को भी बर्बाद करने की पूरी योजना बनाई है।   जिसमे...

हाथरस की घटना का क्या है सच क्या है झूठ जानिए पूरी बात हमारे साथ

हाथरस की घटना का क्या है सच क्या है झूठ जानिए पूरी बात हमारे साथ जैसा की आप सभी जानते है की हाथरस की घटना किस प्रकार दिन ब दिन उलझते जा रही है और जैसे - जैसे समय बीत रहे है नए नए खुलासे रोज सामने आ रहे है जैसा की सभी जानते है की उत्तरप्रदेश के हाथरस मे 14 सितंबर को चंदपा थाने के पास एक गाँव मे 19 साल की एक दलित लड़की के साथ छेदछाड़ और मारापीटी की गयी थी।  जो की सुरुवात मे ऐसा सामने आया और लड़की ने एक विडियो मे बताया की किस प्रकार पारिवारिक आपसी रंजिस मे उसके साथ किस प्रकार का व्यवहार किया गया और उसको जान से मारने की कोशिस भी की गयी उसका गला भी दबाया गया ।  पीड़िता ने नही बताया की उसके साथ छेदछाड़ हुई  लेकिन पीड़िता ने एक बार भी बलात्कार होने की बात नही कहीं पीड़िता ने निर्भीक होकर सारी बातें कहीं , वही दूसरी ओर एक न्यूज़ के साथ सवाल जवाब कर रही पीड़िता की माँ ने दुषकर्म होने की बात कहीं व पीड़िता के भाई व उसके पिता को ये जानकारी न हो ऐसी बात कहीं ।  हालांकि आपको हम जानकारी दे दे की इस पूरे घटना मे पुलिस प्रशासन की कार्यवाही पूरे तरह से निंदनीय है व उसका रवैया बिलकुल भी सहने ल...

TOP 5 NEWS- जो देश मे दबाई जाती है

Top 5 News मुख्य पाँच खबरें यहाँ पढ़े   देश मे दबाई जाती है नमस्कार आज हम बात करेंगे देश के मुख्य पांच खबरों के वह पांच खबर जो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया व प्रिंट मीडिया पर छुपाई जाती है।  उमर खालिद की गिरफ्तारी के बाद लिबरल्स की नींद उड़ गई जैसा कि आप सभी जानते हैं उमर खालिद को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र उमर खालिद को दिल्ली पुलिस ने रविवार को गिरफ्तार किया था फरवरी में नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में दिल्ली के कई इलाकों में दंगे हुए थे और उमर खालिद का नाम भी उस दंगों को भड़काने या उस दंगे को करवाने के लिए षडयंत्र रचने का आरोप है     दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने  उमर खालिद पर गैरकानूनी गतिविधि अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया था और पुलिस ने से लगभग 11 घंटे की पूछताछ की इसके बाद एक खबर आई कि उमर खालिद दिल्ली दंगों के मामले में शामिल होने की वजह से गिरफ्तार किया गया है।  जैसे ही यह खबर न्यूज़ में आई वैसे ही लिबरल गैंग, बॉलीवुड गैंग ,टुकड़े टुकड़े गैंग सोशल मीडिया पर विधवा विलाप शुरू कर चुके हैं।    तमाम लिबरल...

भारतीय झंडे का विवाद समझे क्या है - रुपेश रजक

आज हम बात करेंगे झंडा भी बात पर आखिर भारत में यह झंडा विवाद है क्या ? और किस कारण से यह विवाद बना किस बात को लेकर झंडा का विवाद होता है किन किन नियमों को पालन करना पड़ता है यह सारी बातें आज हम बताएंगे और आप सभी से अनुरोध भी करेंगे कि इसे शेयर करें ताकि और अन्य भी लोगों को जानकारी मिली कि भारत देश के झंडे हैं उसके प्रति हमारी क्या कर्तव्य होनी चाहिए। तो जैसे हमारी पुरानी ध्वज संहिता है जिसमें प्राचीन प्रावधानों की एक लंबी सूची थी जिसमें झंडा फहराने का अधिकार को जी व्यक्तियों का विशेषाधिकार था हो सकता है यह मंत्री होंगे नेता होंगे या बड़े-बड़े उद्योगपति लेकिन वर्ष 2002 में जिंदल समूह के उपाध्यक्ष नवीन जिंदल ने झंडा फहराने के अपने अधिकार पर निबंध को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की थी।  दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश की तिरंगा फहराने मौलिक अधिकार है तथा इसके बाद में ध्वज संहिता के उदारीकरण के प्रश्न के परीक्षण हेतु समिति गठित करने के सर्वोच्च न्यायालय की अनुशंसा के पश्चात सरकार ने समिति गठित की समिति की अनुशंसा के आधार पर केंद्रीय मंत्रिमंड...

भारतीयों के मूल कर्तव्य क्या है आइए जाने

भारतीयों के मूल कर्तव्य क्या है आइए जाने नमस्कार आप सभी स्वस्थ रहें यही कामना करते हैं ।  आज हम बात करते हैं भारत के लोगों के मूल कर्तव्य की कि आखिर में भारतीय को भारत में रहने के लिए किन कर्तव्य का निर्वहन करना जरूरी है. इसका स्पष्टीकरण आपको संविधान के भाग 4 (क) से प्राप्त होगी डॉ स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश सन 1974 के आधार पर 1976 में किए गए 42 वें संविधान संशोधन द्वारा पहली बार भारतीय संविधान में एक नया अध्याय 4 (क) अनुच्छेद 51( क) है मूल कर्तव्य नामक शीर्षक जोड़ा गया है जिसमें 10 मूल्य कर्तव्यों का उल्लेख किया गया था 86 वें संविधान द्वारा एक और कर्तव्य जोड़ा गया और वर्तमान में इसकी संख्या 11 हो गई है कि भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह इन 11 कर्तव्यों का पालन करें वह निर्वहन करें।   सर्वप्रथम संविधान का पालन करें और उसके आदर्शों संस्थाओं राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का आदर करे  स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले कुछ आदर्शों को संजोए रखें और उनका भी पालन करें  भारत की संप्रभुता एकता और अखंडता की रक्षा करना...

भारतीय संविधान की खामियां जानिए क्या है ?

नमस्कार आप सभी ठीक हो ऐसी कामना करते है कोरोना के एक काल से आप बचे स्वस्थ रहे।। बाहर निकलने से बचे व एक दूसरे के सम्पर्क में आने से बचे यही सबसे सटीक दवाई है कोरोना से बचने का। आज हम बात करेंगे भारतीय संविधान की कमी और संविधान के नकारात्मक प्रभाव जो संविधान में नही होने चाहिए थे।। भारतीय संविधान बोहोत ही बड़ा है और विश्व का सबसे लंबा लिखा जाने वाला संविधान है इसके कुछ ऐसे अनुच्छेद है जो अभी तक पालन या कार्य मे नही आये है जो भारत की परंपरा और संस्कृति के बिल्कुल विपरीत है भारत का जो संविधान है वो अधिकार विदेशों के नियमो को देखर छाप दिया गया है। कुछ धारा तो ऐसी है की उन्हें इसलिए रख लिया गया है कि कभी भि इसकी जरूरत पड़ सकती है इसलिए इसे भी रख लिया जाए। संविधान के विरोध में कुछ बोलने वालों का का तर्क कुछ ये भी है कि संविधान का निर्माण करने वाली संविधान सभा वयस्क मताधिकार के सिद्धांत पर निर्वाचित नहीं हुई थी और उसे संप्रभु संस्था भी नही कहाँ जा सकता है । यह संविधान सभा मंत्रिमंडल मिशन योजना के आधार पर गठित की गयी थी और इसका गठन ब्रिटिश संसद द्वारा किया गया जो गलत है । भारत के संविधान...

आखिर आज भी दलित समृद्ध क्यो नही हो सकें इसका कारण क्या है?

                                      आखिर दलित आज भी समृद्ध नही है ऐसा क्यो?  जबकि देश के संविधान निर्माता डॉ भीमराव अंबेडकर जी ने संविधान में दलित समुदायों को आगे आकर शिक्षा के साथ नॉकरी में दाखिल होने व पदोन्नति तक कि सुविधा मुहैया कराई थी। परन्तु आज भी दलित समुदाय के लोग पिछड़े व गरीब क्यो है इसका कारण क्या है आइए प्रकाश डाले। गौरतलब है कि देश के हर राज्य में दलितों में आने वाली जातिया अलग-अलग है जिससे कई राज्य में दलित वर्ग को सामान्य व पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में शामिल होना पड़ता है तथा उनके बच्चो के लिए शिक्षा महंगी पड़ती है जिसके कारण बोहोत से परिवार अपने बच्चों को शिक्षा देने में असमर्थ हो जाते है। जहां पर ये व्यवस्था उपलब्ध है अर्थात जिन राज्यो में दलितों को सरकार द्वारा जो सुविधा मिलती है वो उन्हें मिलती है लेकिन आप ध्यान दे सुविधा मिलने का मतलब ये है कि उन्हें वो मांग करनी होगी आवेदन देना होगा तब स्वीकृति या आगे की जो सुविधाएं है वो उन्हें मिलेंगी । 1) अब प्रश्न ये है कि जिन परिवार ...