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आखिर कोरोना भारत मे किन कारणो से फैला ? पार्ट 1

भारत -  नमस्कार दोस्तों आइये जानते है किन कारणों से भारत देश में कोरोना बढ़ा आखिर कहाँ कमी हुई                                     जिसके कारण देश में कोरोना  अपना पैर पसारने जा रहा है।



जैसा की आप सभी जानते है की कोरोना भारत में जनवरी माह में ही अपना कदम रख चूक था परन्तु जिस प्रकार पूरी दुनिया इसका प्रभाव जानने में अनजान थी उसी प्रकार भारत भी क्योकि शुरुवात में इससे जुडी परेशानी और इससे कितनी नुकसान होने की संभावना है ये चीन के अलावा कोई और देश नहीं जानता था। 
अब बात जो सामने आयी है की जनवरी माह में दुनिया के स्वास्थ का जिम्मा लेने वाली संस्था (WHO )
विश्व स्वास्थ संगठन के अध्यक्ष चीन में किसी कार्यक्रम में शामिल हुवे थे ये बात तो तब की है जब इस आफत से  पूरा विश्व चिंतित नहीं था।  चीन की चोरी जो सामने आई है उससे विश्व का एक हिस्सा बोहोत ही नाराज है और उसके  ऊपर की जाने वाली कार्यवाही का इंतज़ार कर रहा है। जिससे की दुनिया के सभी समृद्ध व शक्तिशाली राष्ट्रों को जो नुकसान उठाना पड़ रहा है  उसकी भरपाई की जा सके परन्तु जीवन की कीमत कोई भी वसूल नहीं कर सकता है ये एक कटु सत्य है क्योकि हज़ारो लाखो की जान सिर्फ एक गलती के कारण उत्पन्न हुई जिसका जिम्मेदार चीन  है  और उसका साथ विश्व  स्वास्थ संगठन ने दिया है जिसके कारण भारत  समेत विश्व की सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका को भी हिला कर रख दिया है। 


बात भारत की जो आपको जानना जरुरी है 
भारत मे कोरोना जनवरी माह में ही दस्तक दे दिया था परन्तु ये महामारी का रूप धारण करेगी इससे सभी अनजान थे फरवरी के महीने में सिर्फ 3 व्यक्ति कोरोना ग्रषित पाए गए थे, जिनको कॉरेन्टीन करके रखा गया था और विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिये जा रहे निर्देशो का पालन किया  जा रहा था फिर कोरोना के मरीजो की संख्या धीरे धीरे बढ़ने लगी और 2 मार्च को संख्या 6 हो गई सरकार ने निर्देश दिया और उन्हें अपनी जानकारी उजागर करने के साथ साथ कॉरेन्टीन रहने के भी निर्देश दिए।
अब भारत  के साथ - साथ पूरा विश्व धीरे - धीरे कोरोना की चपेट में आने लगा था जिसको मद्दे नजर व विश्व की बिगड़ती हालात का जायजा व जानकारी इकठ्ठा करके सरकार सख्ती में आती हुई नजर आई और प्रधानमंत्री जी ने होली जैसे पावन त्योहार में लोगो को दूरी बनाकर रहने व भीड़ भाड़ न करने के निर्देश दिए।
ताकि वायरस एक से होते हुवे दूसरे तक न पहुँच सके।
लेकिन फिर भी इस वायरस की जो लक्षण थी वह सामान्य रूप से शर्दी खाँसी के तरह ही थी जिससे लोगो को लगता था वो ठीक है और उनका रहन सहन नही बदला वो सामान्य जीवन जीते रहें और लोगो से मिलते जुलते रहे। अब उन सभी को ध्यान में रखा जाए तो लोग सरकार के द्वारा दिये निर्देश का पालन करते नजर नही आ रहे थे और देश मे कोरोना संक्रमित की संख्या बढ़ते जा रही थी 15 दिनों में 6 से बढ़कर 194 हो चुकी थी ।
जनता कर्फ्यू की अपील
जनता के सुरक्षा को देखते हुवे और खतरे को भांपते हुवे प्रधानमंत्री जी ने देश को एक सम्बोधन किया गया जिसमें 22 मार्च को जनता कर्फ्यू की अपील की गई और लोगो को घर से न निकले का आग्रह किया जिससे ये पता चले कि कोरोना से किस तरह बचा जाए व उसको प्रभावित रूप से बढ़ने से रोका जाए।
मोदी जे के आग्रह को जनता ने स्वीकार किया परन्तु उन्होंने जनता से 5 बजे 5 मिनट तक थाली , ताली बजाकर हमारे कोरोना योद्धाओं के लिए अभिनन्दन करने का भी प्रस्ताव रखा था ताकि उनको ये लगे कि उनकी मेहनत को पूरा भारत सलाम कर रहा है , इसी बीच 5 बजे भारत के कई हिस्सों में लोग अपने घरों से बाहर निकलकर भीड़ इकठ्ठा करकर अभिवादन करने लगे जो प्रधानमंत्री जी ने नही कहाँ था ये गलती कुछ लोगो की थी जिसका नुकसान भारत को उठाना पड़ रहा है और राजनितिक विपक्ष के नेता उस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरते हुवे नजर आये जिससे उनका नाम विलुप्त होने से बच जाये। 
           लेकिन फिर भी विश्व के अन्य देशों के मुकाबले भारत की स्थिति बोहोत ही संतोष जनक थी।


लोकडाउन करने का निर्णय 
कोरोना के बढ़ते प्रभाव को देखते हुवे सरकार ने लोकडाउन करने का फैसला लिया और जो जहाँ है वही रहे उनके लिए सारी व्यवस्था की जाएगी ऐसा आस्वासन देकर लोगो को लोकडाउन व सरकार के द्वारा दिये गए निर्देश का पालन करने को कहां लोगो को दूर दूर रहने को कहाँ, हमेशा हाँथ धोये व किसी भी हाल में तनाव न लेकर शांति से कोरोना की लड़ाई में सहयोग देने को कहाँ , लेकिन लोकडाउन की घोषणा सुनते ही लोगो मे भगदड़ मच गई राशन के दुकानों में जैसे भूचाल आ गया और ये लापरवाही सरकार ने नही खुद जनता ने बनाई थी क्योकि भारत की जनता को अफवाहों और किसी भी बात को लंबा खिंचने की आदत है जिसके कारण ऐसी स्थिति उपन्न हुई जैसे कोई आपातकाल की घोषणा की गयी है। 
                                   मार्च 28 को कोरोना संक्रमित संख्या 987 हो चुकी थी।।
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