जैसा की आपने पिछला पोस्ट पढ़ा होगा यदि नही तो जरूर पढे ताकि आपको सारी बात समझ मे आए की भारत मे कोरोना का प्रभाव कैसे फैला । पिछला पोस्ट पढ़ने के लिए लेबल मे जाकर कोरोना वाइरस को क्लिक करे आपको यहा मिल जाएगा ।
सरकार ने लोगो क्या - क्या निर्देश दिये थे
- लोग बार बार हांथ धोये
- दूसरों से दूरी बनाकर रखे खासकर उनसे जो बीमार व्यक्ति हो
- अपने आँख , नाक और मूह को बिना हांथ धोये न छुवे
- किसी को खांसी या छिंक आए तो वो रुमाल का उपयोग करे या मास्क का उपयोग करे
लॉकडाउन के बाद
आप सभी जानते है जैसे ही लॉकडाउन का फैसला लिया देश की आम जनता अपना आपा खो गयी और किरानों की दुकानों मे समान लेने के लिए दौड़ पड़ी जैसे की उन्हे राशन मिलने बंद हो जाएंगे और जो अप्रवशी मजदूर थे वो भी 21 दिनो का लॉकडाउन सुनकर अपने अपने घरो को जाने के लिए पैदल या अन्य रिक्शा जैसे साधनो से भागने लगे जो उनके साथ साथ उनके परिवार को भी संकट मे दाल सकती थी लेकिन आप अनुभव कीजिये उनकी पीड़ा का की उनको कितना दर्द हुआ होगा कोई माँ अपने 2 माह की बच्ची को तो कोई 10 साल के बेटे को लेकर पैदल ही निकल गए अपने गाँव जाने के लिए अब आप सोचिए उस माँ का हाल जो इतनी धूप मे चली उस बच्ची के बारे मे सोचिए जो अपने छोटे छोटे पैरो से कितने 100 किलोमीटर की यात्रा के लिए निकल गयी ।हालांकि सरकार और समाजसेवी संस्थाओ के द्वारा उनको भोजन की व्यवस्था कराई जा रही थी लेकिन अब उनकी जो भी पीड़ा रही हो जिसको देखकर उनको ये बोहोत बड़ा कदम उठाना पड़ा और राशन के लिए दौड़ लगाने वालों के कारण लोगो को खाद्य की सामग्री के खत्म होने की चिंता भी सताने लगी जबकि सरकार ने कह दिया था खाने की समान की चिंता न करे देश मे कमी नही होगी इनकी सपलाई की जाएगी फिर भी लोग लापरवाही करते रहे और सरकार ने लोगो को जानकारी दी की लोगो को दूध , फल और खाद्य सामग्री की कमी नही होगी व जो भी मजदूर जहां है उन्हे वही पर भोजन की व्यव्स्था की जाएगी जिससे लोगो को भूखे मरने की नौबत न आए जिसमे राज्य की सरकारो का भी सहयोग मिल रहा था लेकिन फिर भी कुछ राज्य के मुख्यमंत्री अपने राजनीति का खेल खेल रहे थे क्योकि बोहोत से गरीब वर्ग को खाने की सुविधा देने मे वो असमर्थ रहे थे उनकी योजना प्रणाली पर प्रश्न चिन्ह उठाना भी जरूरी है जैसे दिल्ली , मुंबई से ये घटना आई लेकिन फिर भी लोगो का संघर्ष चालू रहा , इसी बीच भारत की बात करे तो सब कुछ सही चल रहा था लेकिन अचानक से लोग 28 तारीख को दिल्ली के आनद बिहार रेलवे स्टेशन पर हजारो की भीड़ मे लोग पलायन करने के लिए सड़कों पर उतर आए थे बिना नियम कानून को ध्यान रखे लोगो सामाजिक दूरी भी भूल चुके थे जिससे पूरे भारत मे तहलका मच गया और राजनीतिक गलियारो से लेकर कानून व्यवस्था तक सवाल के घेरे मे आ गए थे जिसके बाद वायरल वीडियो के जरिये और लोगो से पूछा गया की आपलोग कैसे इकठ्ठा हुवे तो लोगो का कहना था हमे न्यूज़ मे दिखाया और कुछ लोग हमारे बस्ती मे आकार हमे जाने को कह रहे थे की तुमलोगों के लिए बस की व्यवस्था कर दी गयी है सभी को दिल्ली बॉर्डर तक उतार दीय जाएगा उसके बाद उत्तरप्रदेश की सरकार उन्हे उनके घरों तक छोड़ देगी । अब मामला यहा तक भी ठीक था जो हुआ उसने तो संकट मे डाल ही दिया और ये गलती भी देश को भूगतनी थी।
अब आप बात को समझे सरकार ने निर्देश दिया था की लोगो को ये करना है ये नही उसके बावजूद लोगो ने पालन नही किया और देश को एक संकट मे डाल दिया मार्च 28 को जो संख्या थी वो 987 थी लेकिन इस घटना के बाद उसका बढ़ना तय था और उसका परिणाम भी भयानक होने वाला था जिसका परिणाम तो कुछ दिनों बाद पता चलता जब परीक्षण किया जाता फिलहाल भारत धीरे धीरे 1000 की संख्या को प्रवेश कर चूका था और फिर अचानक 31 मार्च को जमाती गैंग विस्फोट हुवा और देश जैसे अब अंधकार और कोरोना के शरण में जा पंहुचा।
आगे जमाती गैंग की जानकारी देंगे हमारे अगले पोस्ट का इंतज़ार करे आप जो भी सवाल करना चाहते है जरूर करे हम कोसिस करेंगे जवाब देने का। नमस्कार

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