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दिल्ली दंगे 2020 अनकही कहानी को प्रकाशित होने से क्यों रोका गया - मोनिका अरोड़ा

जैसा कि आप सभी जानते हैं दिल्ली में जो दंगे हुए थे उसको लेकर काफी मतभेद है और दिल्ली सरकार की मंशा के ऊपर भी बहुत सवाल उठे हैं जो कि जायज है क्योंकि जिस प्रकार से दिल्ली सरकार ने दंगों के अपराधियों को छुपाने के लिए काम किया है वह उनकी पार्टी की गाइडलाइन को फॉलो करती है।
और दंगों के मास्टरमाइंड को बचाने के लिए पूरी ताकत लगा देती है।



वैसे हम आपको बता दें कि दिल्ली राइट 2020 अनटोल्ड स्टोरी पुस्तक का प्रकाशन पब्लिशिंग हाउस ब्लूस में बरी द्वारा किया जाना था जिसके बाद कट्टरपंथी विचारधारा व विदेशी गैंग द्वारा पब्लिशिंग हाउस को परिसर दिया गया जिसके बाद उसने पब्लिक करने से मना कर दिया जिसके बाद गरुड़ ने इसे प्रकाशित करने का फैसला किया है किया था बता दें कि पुस्तक के लिए 30,000 से अधिक पर आ चुके हैं।
भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने ट्वीट कर बताया है किताब की 30000 प्रतियों के आर्डर पहले ही दिए जा चुके हैं मैं प्रतिज्ञा करता हूं कि मैं दिल्ली दंगे की अनकही कहानी की 100 प्रतियां खरीद लूंगा मैं इस किताब की 100 कॉपी खरीद कर लोगों को पढ़ने को दूंगा आइए हम सब मिलकर 50000 बुकिंग का रिकॉर्ड बनाए "50000 किताब करारा जवाब"
इस किताब में दिए गए जितने भी तथ्य हैं वह लेखकों की पड़ताल और इंटरव्यू पर आधारित है इसे ब्लूज में बरी द्वारा सितंबर 2020 में प्रकाशित किया जाना था पुस्तक की 100 प्रतियां प्रिंट की गई है और लेखकों को सौंप दी गई या अमेजॉन पर आर्डर के लिए भी उपलब्ध था हालांकि इस्लामी और वामपंथियों के दबाव में आकर दो जनवरी ने एक बयान जारी कर पुस्तक को वापस लेने की घोषणा की।
तो आप समझ सकते हैं कि जो चीज इन कट्टरपंथी विचारधारा वालों को पसंद नहीं आती उसका खुलकर विरोध करते हैं और अपनी मनगढंत कहानियों को प्रचार प्रसार करने के लिए यह कोई कसर नहीं छोड़ते यह उसका खुला समर्थन करते हैं और बिना तथ्य और बिना सच के यह लोग झूठी खबर फैलाते हैं और बाद में उनका भांडा भी फूटता है फिर भी यह हम सभी को सूचना चाहिए कि आखिर हम सच का साथ क्यों नहीं देते हम सच सामने लाने वालों का साथ क्यों नहीं देते क्या यह हमारी कमी नहीं है क्या यह हमारी भूल नहीं है आखिर हम गलत विचारधारा पर उसे जाने वाली लोगों को चुप क्यों नहीं करते हम आखिर इनके झूठ को क्यों कहते हैं।

22 अगस्त 2020 को इस किताब के वर्चुअल विमोचन के दौरान ब्लूम्सबरी यूके मुख्यालय से दबाव बनाया गया देख के बाद प्रकाशन समूह ने अचानक की किताब प्रकाशित करने से मना कर दिया था बाद में पुस्तक की लेखिका मोनिका अरोड़ा ने बताया कि उन्हें गरुड़ प्रकाशन के माध्यम से पुस्तक प्रकाशित करने का फैसला किया है और पुस्तक हिंदी में भी प्रकाशित हो रही है इस बात की पुष्टि करते हुए अरुण प्रकाश ने भी ट्वीट किया था साथ ही उन्होंने किताब की लेखिका मोनिका अरोड़ा का आभार भी जताया था। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा था दोस्तों आप सभी के सहयोग के लिए धन्यवाद आइए इस किताब को घर-घर तक पहुंचाएं इसके बाद प्रकाशन समूह ने ट्वीट करके यह जानकारी भी दी थी की किताब हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में समुचित की जाएगी जल्द ही यह किताब उपलब्ध कराई जाएगी।

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ब्लूसम्बरी पर इस किताब की मैनूस्क्रिप्ट लीक करने का आरोप भी लग रहा है इस किताब की मैंनुस्क्रिप्ट व्हाट्सएप पर वाले हो रही है।कई सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठाया कि कैसे पूरी पुस्तक अवैध रूप से जारी किया गया है उनका कहना है। कि इस तरह से पुस्तक को सोशल मीडिया पर शक नहीं किया जा सकता बताया जा रहा है कि वह वही कॉपी है। जो ब्लूसम्बरी के पास थी मनुष्य दूसरे पर स्पष्ट रुप से लिखा है कि या एक कॉपी है द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है।

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