नमस्कार आप सभी ठीक हो ऐसी कामना करते है कोरोना के एक काल से आप बचे स्वस्थ रहे।।
बाहर निकलने से बचे व एक दूसरे के सम्पर्क में आने से बचे यही सबसे सटीक दवाई है कोरोना से बचने का।
आज हम बात करेंगे भारतीय संविधान की कमी और संविधान के नकारात्मक प्रभाव जो संविधान में नही होने चाहिए थे।।
भारतीय संविधान बोहोत ही बड़ा है और विश्व का सबसे लंबा लिखा जाने वाला संविधान है इसके कुछ ऐसे अनुच्छेद है जो अभी तक पालन या कार्य मे नही आये है जो भारत की परंपरा और संस्कृति के बिल्कुल विपरीत है भारत का जो संविधान है वो अधिकार विदेशों के नियमो को देखर छाप दिया गया है।
कुछ धारा तो ऐसी है की उन्हें इसलिए रख लिया गया है कि कभी भि इसकी जरूरत पड़ सकती है इसलिए इसे भी रख लिया जाए। संविधान के विरोध में कुछ बोलने वालों का का तर्क कुछ ये भी है कि संविधान का निर्माण करने वाली संविधान सभा वयस्क मताधिकार के सिद्धांत पर निर्वाचित नहीं हुई थी और उसे संप्रभु संस्था भी नही कहाँ जा सकता है । यह संविधान सभा मंत्रिमंडल मिशन योजना के आधार पर गठित की गयी थी और इसका गठन ब्रिटिश संसद द्वारा किया गया जो गलत है ।
भारत के संविधान को वकीलों का स्वर्ग माना गया है क्योंकि संविधान को आम भारतीय आसानी से नही समझ सकते उन्हें किसी कानूनी जानकर व्यक्ति से ही जनकारी प्राप्त हो सकती है क्योकि यह बोहोत ही जटिल और अस्पष्ट भाषा से भरा पड़ा है । संविधान में अनेक उपबन्धों को विस्तृत एवम असंदिग्ध भाषा मे क्रमबध्द किया गया है जिसके कारण आम भारतीय नागरिक को इसे समझने में कठिनाई होती है और इसे समझना भी कठिन है। इस संविधान को कानूनी विशेषज्ञ ही समझ सकते है।।
भारतीय संविधान केंद्र की जो सरकार है उसे बोहोत ज्यादा शक्ति प्रदान करती है जो राज्यों के अधिकार को कम दर्शाती है और राज्य को सिर्फ एक योजना तक सीमित करके रख दिया गया हो जैसे कि नगरपालिका हो । केंद्र सरकार को दिया गया अधिकार जैसे लगता है कि संविधान का पूरा योगदान सिर्फ केंद्र के पास रहे। भारत के राष्ट्रपति द्वारा राज्यों के राज्यपालों की नियुक्ति, एकीकृत न्याय ,इकहरी नागरिकता अखिल भारतीय सेवाएं तथा राष्ट्रपति की संकटकालीन शक्तियॉ हमारे संविधान के प्रमुख एकात्मक लक्षण है।
जिस समय भारत का संविधान लागू किया गया था , उस समय इसमें 395 अनुच्छेद एवं 8 अनुसूचियां थी , जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान में केवल 7, कनाडा में संविधान में 147, अफ्रीका के संविधान में 253 तथा आस्ट्रेलिया के संविधान में 128 अनुच्छेद है।।
एक तो ये दो राज्यों के बीच सीमाओं के निर्धारण रेड क्लिफ की अध्यक्षता वाले सिमा आयोग ने किया जो सिर्फ पाकिस्तान के पक्ष में फैसला लेते गया और देश के विभाजन के वक्त भारत को आहत करने वाले कदम उठाए जिसके कारण भारत आज भी उन परेशानी का सामना कर रहा है जैसे कि पाकिस्तान में पश्चिम पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान, पूर्वी-बंगाल, उत्तर- पश्चिम सीमा छेत्र एवम असम के सिलहट जिला शामिल किया गया जो पाकिस्तान के पक्ष में थे।।
हमारा सवाल है आखिर संविधान गठित की जाने वाली बैंच ने क्या सोचा और संविधान की खामियां अब के 21वीं सदी के भारत मे बोहोत सारी निकल कर सामने आई है जिसका बदलाव सुरु किया जा चुका है आखिर आज़ादी के तब के भारत और अब के भारत मे बोहोत अंतर है तो संविधान का संसोधन भी जरूरी है।।
आप अपने संविधान को लेकर क्या सोचते है जरूर बताएं ।।
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और लोगो को जागरूक करे की संविधान का संसोधन होना आज के नव युग भारत को जरूरी है।।
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