भारतीयों के मूल कर्तव्य क्या है आइए जाने
आज हम बात करते हैं भारत के लोगों के मूल कर्तव्य की कि आखिर में भारतीय को भारत में रहने के लिए किन कर्तव्य का निर्वहन करना जरूरी है.
इसका स्पष्टीकरण आपको संविधान के भाग 4 (क) से प्राप्त होगी
डॉ स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश सन 1974 के आधार पर 1976 में किए गए 42 वें संविधान संशोधन द्वारा पहली बार भारतीय संविधान में एक नया अध्याय 4 (क) अनुच्छेद 51( क) है मूल कर्तव्य नामक शीर्षक जोड़ा गया है जिसमें 10 मूल्य कर्तव्यों का उल्लेख किया गया था 86 वें संविधान द्वारा एक और कर्तव्य जोड़ा गया और वर्तमान में इसकी संख्या 11 हो गई है कि भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह इन 11 कर्तव्यों का पालन करें वह निर्वहन करें।
- सर्वप्रथम संविधान का पालन करें और उसके आदर्शों संस्थाओं राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का आदर करे
- स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले कुछ आदर्शों को संजोए रखें और उनका भी पालन करें
- भारत की संप्रभुता एकता और अखंडता की रक्षा करना सभी भारतीयों का कर्तव्य है
- देश की रक्षा करें और आवन किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करें यह भारतीय नागरिक की सबसे बड़ी योगदान है और भारतीय होने की एक भूमिका भी है कि आप भारत देश के नागरिक होने के नाते आप देश को क्या देना चाहते हैं इसलिए हम इस लाइन को बहुत ही सम्मान के साथ देखते हैं
- भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भ्रातृत्व की भावना का निर्माण करें जो धर्म भाषा प्रदेश और वर्ग पर आधारित सभी भेदभाव से परे हो इनमें कोई भी भेज ना हो ऐसी प्रथा का त्याग करें जो स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध है और महिला वर्ग को सूचित करती हूं उनका शोषण होता हो ऐसे प्रथाओं को अस्वीकार किया जाए
- हमारी सामाजिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझे और उसका परीक्षण करें और परीक्षण परिणाम के बाद इसका प्रचार करें
- प्राकृतिक पर्यावरण की जिसके अंतर्गत वन झील नदी और वन्य जीव जंतुओं की रक्षा करें तथा प्राणी के प्रति दया भाव रखें जिससे आपकी इंसानियत की पहचान हो सके इसलिए जीव जंतुओं की रक्षा करना भी आपका भारत के नागरिक होने के नाते एक बहुत ही बड़ा कर्तव्य है
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करें जिससे देश उन्नति की राह पर आगे चले वह अग्रसर हो
- सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षा रखें और हिंसा से दूर रहें ताकि सामान्य जनमानस को कोई भी हानि ना हो वह सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान ना हो जिससे देश की व्यवस्था बिगड़े
- व्यक्तिगत और सामूहिक रूप में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का हमेशा प्रयास करें जिससे राष्ट्र निरंतर आगे बढ़ते हुए प्रेत और उपलब्धि की नई ऊंचाइयों को छू ले और विश्व में भारत देश को लोग एक आदर्श के रूप में माने जिससे कि लोग सीखे कि भारत के लोगों के संस्कार और रहन-सहन विदेशों की तुलना में सबसे स्वच्छ सुंदर और तारीफ के काबिल है
आखिर में जो सबसे आखिरी 86 वा संविधान संशोधन किया गया वह 11वीं लाइन कितनी महत्वपूर्ण है और यह क्यों जोड़ा गया यह हम आपको बताते हैं संविधान के इस 86 वें संविधान संशोधन अधिनियम 2002 के अंतर्गत संविधान के अनुच्छेद 91 का में संशोधन करके जे के बाद अनुच्छेद का जोड़ा गया है। इसमें 6 साल से 14 साल तक की आयु के बच्चे के माता-पिता या अभिभावक अथवा संरक्षक को अपने बच्चों को शिक्षा दिलाने के अवसर उपलब्ध कराने का प्रावधान है जिसके अंतर्गत देश में बच्चों की शिक्षा और देश की पूरी शिक्षा प्रणाली के ऊपर ध्यान दिया गया है कि भारत का हर एक बच्चा पढ़ें और उसके माता-पिता उसे पढ़ाने के लिए अपना पूरा योगदान दें।
भारतीय संविधान की खामियां जानिए क्या है ?
यह मुख्य 11 मूल कर्तव्य है जिसे अंग्रेजी में फंडामेंटल ड्यूटीज कहते हैं 11 कर्तव्य को हमेशा हर भारतीयों को अपने साथ लेकर चलना चाहिए और संजोय रखना चाहिए कि हमें अपने देश के प्रति क्या करना है और हम क्या करते हैं जो देश का भला करें और देश के उन्नति के लिए काम आए। इसलिए हम सभी भारतीय का यह प्रयास होना चाहिए कि हमारे द्वारा किया गया कार्य देश हित में हो हमारे द्वारा किया गया कोई ऐसा कार्य जो देश हित में है उसे हमें सुधार करना चाहिए और दोबारा ऐसा कार्य ना हो इसके लिए हमें खुद में भी सवाल उठाने चाहिए कि मेरे द्वारा किया गया हिंसा या मेरे द्वारा किया गया व्यवहार किसी व्यक्ति के साथ-साथ देश की छवि को नुकसान न पहुंचाएं और इसीलिए इन 11 मूल कर्तव्य को संविधान में दिया गया है। जो कि एक भारतीय होने की पहचान बनाता है और भारतीयों को क्या कर्तव्य का पालन करना है यह सिखाता है। इसलिए हमें हमेशा अपने देश पर अनुमान करना चाहिए और देश की संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए अपनी संस्कृति को पहचानना चाहिए और पहचान करने के बाद उसका प्रचार भी करना चाहिए जिससे विश्व की अन्य देश हमारी संस्कृति को आदर भाव से सम्मान करें और पूरा देश भी भलाई के रूप में शांति के रूप में और अहिंसा के रूप में जाना जाए क्योंकि हमारी संस्कृति ही अहिंसा से भरी हुई है। जहां पर हिंसा का कोई भी अध्याय नहीं जुड़ा हुआ है इसलिए हम भारतीयों को हमेशा अपने देश के लिए हमेशा लड़ने के लिए तत्पर होना चाहिए कि हमारे देश के लिए अगर कभी भी हमारी जान की कीमत या हमारी जरूरत हो तो हम सर्वप्रथम शुरू की पंक्ति में खड़े रहे वह देश को बचाने के लिए हम अपना जान भी निछावर कर दें।
जय हिंद जय भारत
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