कब होगा मन्दिर सरकार के हाँथ से बाहर , दान के पैसों का हो राह दुरुपयोग सद्गुरु जग्गी वसुदेव ने उठाया सवाल - shut up virodhi
देश के हर राज्य में राज्य सरकारों ने लाखों मंदिरों पर कब्जा बनाया हुआ है जो संविधान ने विधान से दिया गया हैं ऐसा बताया जाता है।
देश मे अधिकतर ऐसे राज्य है जो सनातन धर्म (हिन्दू धर्म) के मंदिर / देव स्थलों को कब्जा किये हुवे है और श्रद्धालुओं द्वारा दिये गए दान के पैसों का उपयोग गलत कार्य मे या अपने स्वार्थ के लिए खर्च कर रहे है जिसको देखते है हुवे दक्षिण के ओर से ''ईशा फाउंडेशन'' के सदगुरू ने मुहिम सुरु और अब विश्व हिन्दू परिषद ने भी जोर डालते हुवे मन्दिरों को सरकारी तंत्र से छुड़वाने के लिए अपनी गंभीरता प्रकट की है।
विश्व हिन्दू परिषद (VHP) ने देश के 4 लाख से अधिक मंदिरों को सरकार के नियंत्रण से मुक्त कराने के लिए अपनी ओर से घोषणा की है। विहिप के केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे ने कहां है की विभिन्न राज्यों की सरकार ने देश के 4 लाख से अधिक मंदिरों कों कब्जा कर रखा है। वह कहते है कि मेरे ओर से एक निवेदन है कि इन मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया जाए, विहिप कुछ दिनों में इस मुद्दे को लेकर सरकार के पास जाने वाली है।
राज्य सरकारों के साथ बातचीत कर के उन्हें कहा जाएगा कि वो मन्दिरों को अपने कब्जे से मुक्त करें। विहिप ने कहा कि अगर हमें जरूरत पड़ी तो हम इसको लेकर कानूनी लड़ाई भी लड़ेंगे और सुप्रीम कोर्ट में केस भी दर्ज करेंगे। विहिप ने कहा है कि कुछ मीडिया संस्था के द्वारा ये जानकारी दी गयी है की समाज हित में उपयोग किए जाने के बजाए दानदाताओं द्वारा मठ- मंदिरों को दी गई जमीनों का उपयोग दूसरे कामों के लिए किया जा रहा है।
संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर सहित कई संगठनों ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से विहिप की इस पहल का समर्थन किया है RSS नेता नरेंद्र ठाकुर ने कहा है कि हिंदू मंदिर सरकारी नियंत्रण से मुक्त होने चाहिए तथा उनका संचालन समाज के स्तर से होनी चाहिए, उन्होंने कहा कि मंदिर में आए धन का उपयोग सामाजिक कार्य में होनी चाहिए परांडे ने सभी मंदिरों में हिंदू धर्म के प्रचार के लिए केंद्र बनाने की बात की है।
उन्होंने कहा मंदिरों में दान का उपयोग हिंदू संस्कृति को बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए कई सरकार द्वारा मंदिर पर कब्जा कर भारतीय संस्कृति को समाप्त करने की साजिश रची जा रही है कई मंदिरों में तो पूजा पाठ तक ठीक से नहीं किए जाते हैं इसके लिए समाज के लोगों को आगे आकर सरकारों पर दबाव बनाना चाहिए कि वे मंदिरों के संचालन की जिम्मेदारी समाज को सौंपे और श्रद्धालु ही मंदिर का प्रबंधन करें।
एक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आंध्रप्रदेश में तिरुपति तिरुमला मंदिर का चढ़ावा प्रतिवर्ष श्रद्धालुओं के दान थे 1300 करोड़ रुपए आते हैं। इसमें से 85% धनराशि को सीधा सरकारी राजकोष में भेज दिया जाता है उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रदेश सरकार के कहने पर वहां के 10 मंदिरों को अपनी जमीन गोल्फ कोर्स लाने के लिए देनी पड़ी जबकि हिंदुओं ने इस कार्य के लिए जमीन नहीं दी थी जमीन का उपयोग धर्म के कार्य के लिए नहीं हुआ।
इसी प्रकार तमिलनाडु में सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने इस मिशन में इसी तरह का अभियान पहले शुरू किया था और उन्होंने तमिलनाडु का उदहारण देते हुए बताया था कि वह करीब 12000 मंदिर बन्द होने के स्थान की ओर है वह खात्मे की ओर बढ़ रहे हैं क्यों? क्योंकि वहां पूजा नहीं हो रही है 34000 मंदिर ऐसे हैं जिन्हें ₹10000 के हिसाब से अपने कामकाज चलाने पड़ते हैं 37000 मंदिर वह ऐसे हैं जहां सिर्फ एक ही व्यक्ति है जिसके हाथ में पूजा की पूरी जिम्मेदारी है
यह बातें जो अखबारों में और खुद जग्गी वासुदेव जी के द्वारा बताया गया है और मंत्री जी के द्वारा बताया गया है लेकिन क्या आप एक भारतीय हिंदू नागरिक होने के नाते अपने कर्तव्य का निर्वहन नहीं कर सकते क्या हमें अपने धर्म के लिए अपने मंदिरों को सरकारों के चंगुल से बचाने के लिए आवाज उठाने वाले लोगों का साथ नहीं देना चाहिए क्या हम अपने आने वाले पीढ़ियों के भविष्य की चिंता नहीं कर सकते हमें आवाज उठानी होगी और एक साथ आगे आना होगा जिससे कि हिंदू धर्म के प्रति हो रहे अन्याय को रोका जा सके और अपने धर्म की पराजय को रोकने के लिए जो भी कार्य आपके द्वारा किया जाए वह बहुत ही महत्वपूर्ण है और वह आने वाले भविष्य के लिए भी बहुत ही उज्जवल भविष्य को लेकर आने वाली है तो अगर आपको यह पोस्ट अच्छा लगा तो शेयर जरूर करें ताकि और लोग भी इसे पढ़कर जागरूक हो और इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।
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