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बिहार: आखिर क्यों चाहते है जातीय जनगणना महागठबंधन के लोग ?

बिहार: जातीय जनगणना क्यों और किस लिए किया जा रहा है और इसके लिए बिहार की सरकार की मंशा क्या है हम पढ़ेंगे पूरी खबर।

जैसा कि बिहार में जाति जनगणना की मांग बहुत पहले से की जा रही है और कई बार इस पर चर्चा भी हुई है क्योंकि जिस वक्त बिहार में भाजपा और जेडीयू की गठबंधन की सरकार चल रही थी उस समय भी जाति जनगणना पर जेडीयू ने काफी दबाव बनाया था और भारतीय जनता पार्टी को कहा था इस पर वह विचार करें और जाति जनगणना किया जाए जिससे कि सरकार की योजना का लाभ हम लोगों को मिल सके।

लेकिन क्या जातीय जनगणना से आम आदमी को या गरीब तबके के दबे कुचले आदिवासी अनुसूचित जाति जनजाति के लोगों को क्या फायदा मिलेगा क्या जातीय जनगणना से सरकार की बजट तैयार होगी या सरकार की योजनाएं बनेंगी क्या ऐसा होने पर वास्तव में गरीब और दबे कुचले लोगों को न्याय मिलेगा या लाभ मिलेगा या समय बताएगा लेकिन इसके पीछे कहीं राजनीति तो नहीं है क्या वोट बैंक के लिए तो यह प्रयास नहीं किया जा रहा।

हम ऐसा इसलिए कह सकते हैं क्योंकि भाजपा के साथ गठबंधन तोड़कर जेडीयू ने आगजनी के साथ और अन्य दलों के साथ सरकार बनाई जिसके बाद ही जाति जनगणना किए जाने की संभावना बन पाई और अब 7 जनवरी 2023 से 21 जनवरी 2023 तक प्रथम चरण का यह जातीय जनगणना प्रारंभ किया जाएगा।

जनगणना में लगभग 518000 कर्मी भाग लेंगे और वह ढाई करोड़ से भी अधिक परिवारों तक पहुंचेंगे और उन सभी का आंकड़ा प्रस्तुत करेंगे जिसमें लगभग सभी आवासीय परिसरों का निरीक्षण भी किया जाएगा और सभी आवासीय परिसरों का आंकड़ा पेश किया जाएगा।

गरीब को फायदा या नुकसान
हम इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कह सकते लेकिन हम यह उम्मीद करेंगे कि बिहार की सरकार के पास जब आंकड़े आ जाएं तो वाकई में गरीब लोगों को और जातीय आधार पर जिस जात के जो लोग हैं उनको लाभ मिले हालांकि यह होना असंभव है क्योंकि अब हम अगर इस डाटा पर जाएं तो हम यह समझ सकते हैं कि अगर मान लीजिए किसी गांव या शहर में किसी बिरादरी के 50 लोग हैं तो सरकार यह किस प्रकार योजना बनाएगी कि उन 50 बिरादरी यो को फायदा हो वह भी जाति के आधार पर।

क्या यह संभव है क्या आप कमेंट पर जरूर बताएं।


जनता हित में या दल हीत में

जातीय जनगणना से जनता को कितना लाभ होगा या नहीं लेकिन शायद गर्ल के हित में यह काम जरूर करेगा क्योंकि नेता यही चाहते हैं कि हमें किस प्रकार पता चले कि किस जाति के लोग किस क्षेत्र में है किस स्थिति पर है ताकि हम जाति के आधार पर वोट मांग सकें और जो कम्युनिटी है बिल्ड कमंडी हिंदू कम्युनिटी उस कंप्यूटर को कैसे तोड़ कर अपने वोट को मजबूत करें और सरकार बनाकर निरंतर जनता को लूटते रहे क्योंकि या लॉजिक बिल्कुल भी काम नहीं करता कि जातिगत आधार पर जनगणना करने से हर एक व्यक्ति को लाभ होगा।

आपको क्या लगता है आप कमेंट पर अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें क्या सरकारी योजना का लाभ देने का मापदंड गरीबी होना चाहिए या जाति धर्म होना चाहिए हमारे समझ से लोगों को लाभ देने का जो सर्वप्रथम मापदंड होना चाहिए गरीबी होना चाहिए चाहे वह किसी भी धर्म जाति पंथ समुदाय वर्ग का क्यों ना हो हमें गरीबी के आधार परउसके लिए योजना बनानी चाहिए और उस को लाभ पहुंचाने के लिए काम करना चाहिए ना कि हमें जाति के आधार पर एक तरफ हम देश को विश्व गुरु बनाने के ओर बढ़ रहे हैं और एक तरफ हम धर्म जाति पर बैठे लोगों को एकजुट कर रहे हैं कि किस प्रकार से देश में एकजुटता आए और लोग जाति पाती से बढ़कर एक कम्युनटी बने एक ही समावेश के एक राह पर चलने वाले यात्री बने।


जाती आधारित जनगणना की प्रमुख बातें

सबसे पहले मकानों की गिनती होगी.

सभी मकानों को एक यूनिक नंबर दिया जायेगा.

एक मकान में यदि दो परिवार अलग-अलग रहते होंगे, तो उनका अलग-अलग नंबर होगा.

एक अपार्टमेंट के सभी फ्लैट का अलग-अलग नंबर दिया जायेगा.

जाति गणना के फॉर्म पर परिवार के मुखिया का हस्ताक्षर अनिवार्य होगा.

राज्य के बाहर नौकरी करने गये परिवार के सदस्यों की भी

जानकारी देनी होगी.

जाति गणना में उप जाति की गिनती नहीं होगी.

एक फरवरी से परिवारों की आर्थिक स्थिति की भी जानकारी जुटाई जाएगी.

प्रखंड में उपलब्ध सुविधाओं की भी जानकारी जुटाई जाएगी. जैसे- रेललाइन, तालाब, स्कूल, डिस्पेंसरी आदि..

गणना कार्य में लगाए गए कर्मियों के पास आई कार्ड होगा. इसपर बिहार जाति आधारित गणना 2022 लिखा होगा.

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