उत्तरप्रदेश: जैसा कि उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. कल्याण सिंह जी के शव पर भाजपा के झंडे रखे जाने से विवाद हो उठा है और ये विवाद विपक्ष की घटिया सोच और अधूरी जानकारी के कारण है।
आपको बता दे कि स्व. कल्याण सिंह जी के शव को रखा गया था ताकि सभी लोग उनका आखरी दर्शन करले राज्य के मुख्यमंत्री, राज्यपाल और कई बड़े बड़े नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और श्रधांजलि देने वालो ने उन्हें स्नेह से और मन से उनके आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना किया।
लेकिन हुवा कुछ ऐसा जो विवादों में घिर गया हुवा ये की शव पर राजकीय सम्मान के साथ विदाई मतलब भारत के झंडे को उनके कफन के रूप में रखा जाता है और सम्मान के साथ उनको विदा किया जाता है लेकिन जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जे.पी. नड्डा जी आये उनको श्रधांजलि देने उस वक्त वो भजपा का झण्डा लेकर आये उसे चढाया उसके बाद शव के ऊपर रखा गया ।
जबकि भारत का गौरव हमारा झण्डा उनके पूरे शरीर मे रखा गया था और भाजपा का झण्डा कुछ देर बाद हटा लिया गया था, तो इसमें विवाद करने और सवाल उठाने जैसे कुछ भी नही है।
ऐसा क्यो किया गया लोगो का कहना है ये तिरंगे का अपमान है ये बात बिल्कुल गलत हो सकती है लेकिन क्या किसी की आखरी इक्षा को पूरा नही करना ये मानवता के लिए गर्व का विषय है किसी भी धर्म मे मनुष्य की आखरी इक्षा क्या होती है उसे पूरा किया जाना चाहिए और किया जाता है क्योंकि लोगो की मान्यता है कि उनकी आत्मा की शांति के लिए ये किया जाता है ऐसा नही करने पर उनकी आत्मा को शांति नही मिलती और वो भटकती है।
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हम इस तथ्य पर ज्यादा चर्चा नही करेंगे लेकिन क्या विपक्ष को यह नजर नही आया कि स्व. कल्याण जी की आखरी इक्षा थी उन्होंने अपने एक सम्बोधन में साफ-साफ कहाँ भाजपा मेरे लिए सबकुछ है और ये मेरी आखरी इक्षा रहेगी कि जब मैं मरु तो भाजपा के झंडे पर मरु भाजपा का झण्डा मेरे कफन पर होना चाहिए।
अब कुछ लोगो का कहना है कि भाजपा के झंडे को नीचे रखा जा सकता था ऊपर तिरंगे को रखा जा सकता था लेकिन क्या अपने ये नही देखा कि शव पर पूरा का पूरा तिरंगा लपेटा हुवा था और भाजपा का झण्डा ऊपर से सिर्फ रखा गया था और वो झण्डा भी छोटा था जिससे कि तिरंगे को पूरे तरीके से देखा जा सकता था।
तो ये विवाद का विषय कैसे हुआ ये सोचने वाली बात है एक बात आप सभी पाठको से बताऊ अगर भाजपा ने तिरंगे को ऊपर और भाजपा का झण्डा निचे रखा होता तब भी विपक्ष विरोध करता और उसे गलत ठहराता क्योकि ये ऐसा विपक्ष है जो बिना सिर पैर के विरोध करता है।
जिसका हकीकत से कोई तालमेल नही होता है इसलिए विपक्ष के बातों पर न आये कल्याण जी की आखरी इक्षा थी जिसे भाजपा के द्वारा पूरा किया गया।।
हालांकि इस मुद्दे को तूल देना बेवकूफी है आप इस भीड़ का हिस्सा न बने।
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